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भौगोलिक दृष्टि से संभाग म.प्र. राज्य के उत्तर में स्थित है। संभागांतर्गत 3 जिले मुरैना, श्योपुर , भिण्ड शामिल हैं। संभाग का मुख्यालय मुरैना शहर स्थित ए0बी0 रोड पर आयुक्त कार्यालय , भवन में है, जो रेल्वे स्टेशन से 4 कि.मी. की दूरी पर है। जिसमें कुल 16 तहसील एवं 16 जनपद पंचायतें स्थित हैं। राजनैतिक दृष्टि से संभाग 2 लोकसभा संसदीय क्षेत्र मुरैना एवं भिण्ड तथा 13 विधानसभा क्षेत्रों में विभाजित है।

संभाग की विशेषतायें

भिण्डः-


भिण्ड भारत के मध्य प्रदेश राज्य का एक शहर है। भिण्ड अपनी कलात्मक सौन्दर्य और वास्तु सुंदरता के लिए जाना जाता है। गौरी सरोवर के किनारे एक प्राचीन गणेश मन्दिर स्थित है। भिण्ड का सबसे बड़ा गाँव अमायन है। दंदरौआ मंदिर यहाँ का एक प्राचीन हनुमान मन्दिर है। वहाँ पर प्रतिष्ठित हनुमान जी की मूर्ति डॉ हनुमान के नाम से प्रसिद्ध है। वनखंडेश्वर मन्दिर पृथ्वीराज चैहान द्वारा निर्मित एक शिवालय है। जो कि गौरी सरोवर के निकट है। भिंड चम्बल नदी के बीहड़ के लिए भी प्रसिद्ध है, जहाँ कुछ समय पहले तक डाकुओं का राज़ रहा। ऐसा माना जाता है ,भिण्ड का नाम भिंडी ऋषि के नाम पर रखा गया है।इसके नाम पर भदावर राजाओं के राजगुरू भिंडी ऋषि के नाम और है। भारत के सर्वाधिक सम्पन्न और शिक्षित जिलों में से एक भिण्ड मंत्रमुग्ध कर देने वाली सुंदरता के लिए भी जाना जाता है। भिंड जिले से करीब 30000 सैनिक देश की सुरक्षा में तत्पर हैं। यहाँ मध्यप्रदेश के दूसरे सैनिक स्कूल खोला जाएगा।(पहला सैनिक स्कूल रीवा में है।) मालनपुर यहाँ का औद्योगिक क्षेत्र है, जो कि गोहद तहसील में ही पड़ता है। जिसे सूखा पॉर्ट भी कहा जाता है। गोहद तहसील स्थित गोहद के किले को यूनेस्को की विश्व हेरिटेज साइट घोषित किया गया है। भिंड जिला भोपाल इंदौर जबलपुर के बाद सर्वाधिक पुरूष साक्षर जिला है।

मुरैनाः-


मुरैना मध्य प्रदेश राज्य का एक जिला है। इसका मुख्यालय मुरैना में है। उत्तरी मध्य प्रदेश में स्थित मुरैना चंबल घाटी का प्रमुख जिला है। जिले के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 50 प्रतिशत भाग खेती योग्य है। जिले का 42.94 प्रतिशत क्षेत्र सिंचित हैं। नहर इस क्षेत्र की सिंचाई का मुख्य साधन है। जिले की मुख्य फसल गेहूँ है। सरसों का उत्पादन भी जिले में प्रचुर मात्रा में होता है। खरीफ की मुख्य फसल बाजरा है। यह जिला कच्ची घानी के सरसों के तेल के लिये पूरे मध्य प्रदेश में जाना जाता है। इस जिले में पानी की आपूर्ति चम्बल, कुँवारी, आसन और शंक नदियों द्वारा होती है। चम्बल नदी का उद्गम इन्दौर जिले से हुआ है। यह नदी राजस्थानी इलाके से लगती हुई उत्तर-पश्चिमी सीमा में बहती है। पर्यटन के लिए आने वालों के देखने के लिए यहां अनेक दर्शनीय स्थल हैं। इन दर्शनीय स्थलों में सिहोनिया, पहाडगढ़, मीतावली, नूराबाद,टीन का पुरा का राम जानकी मंदिर, सबलगढ़ का किला और राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य प्रमुख हैं। यहां एक पुरातात्विक संग्रहालय और गैलरी भी देखी जा सकती है। यह जिला ग्वालियर नगर से लगभग 46 किलोमीटर की दूरी पर है। मुरैना का प्राचीन नाम मयूरवन है जो की महाभारत काल के समय बहुत प्रसिद्ध था। इसी जिले का एक छोटा सा साॅटा नामक गांव हैं जिसमें जिले के सभी गांवों की अपेक्षाकृत अधिक मोर पाये जाते हैं यह मुरैना नगर से १० किलो मीटर की दूरी पर स्थित है । मुरैना अब विकासशील जिला बन चुका है।इस जिले मे कई धार्मिक स्थान भी हैं जो देखने मे अद्भुत कला के धनी है।इन सब मे प्रसिद्ध हैं-रतनदास जी (पटिया वाले बाबा) का मंदिर,जो करह धाम में है। बाबा देवपुरी का मंदिर, गंगापुर धाम जो जनकपुर में है।और कई ऐसे मंदिर है जिन्हे देखे बिना मन नहीं भरता। देश के कई राज्यों के लोगों का यहाँ ताँता बँधा रहता है।

श्योपुरः-


श्योपुर ज़िला मध्य प्रदेश के पूर्वी भाग में स्थित है। श्योपुर के पूर्व में मध्य प्रदेश के शिवपुरी, पश्चिम में राजस्थान के कोटा, उत्तर में मुरैना, ग्वालियर एवं दक्षिण में राजस्थान के कोटा ज़िले से जुड़ा हुआ है। यह ज़िला सड़क मार्ग से व्यवस्थित रूप से जुड़ा हुआ है। श्योपुर ग्वालियर नैरोगेज लाईन से भी जुड़ा हुआ है। यहा से विजयपुर, कराहल और बड़ौदा के लिए परिवहन सेवाएं उपलब्ध हैं। पालपुर (कुनो) की वाइल्ड लाइफ सेंचुरी यहाँ का मुख्य पर्यटन स्थल है। ककेता जलाशय भी मुख्य रूप से इसी ज़िले में है। यह ज़िला लकड़ी के फ़र्नीचर के लिए भी प्रसिद्ध है। यहाँ पर सागौन के दरवाजे, खिड़की आदि बहुत ही खुबसूरत ढंग से बनाए जाते हैं। ज़िले में मुख्य रूप से चंबल, सीप और कुनो नदियाँ बहती हैं। चंबल नदी इंदौर से होते हुए दक्षिण-पूर्व मध्य प्रदेश की ओर बहती है। ज़िले के 15 प्रतिशत गाँव सड़क व रेल मार्ग से जुड़े हुए हैं। सड़क मार्ग सभी तहसील मुख्यालयों से जुड़ा हुआ है। श्योपुर की कराहल तहसील में प्रदेश की सहरिया जनजाति निवास करती है।